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वीर सपूत

द्वंद्व का शौक है तो, मैदान में आना सीखो,
हो अगर फौलादी जिगर तो, आँखों को मिलाना सीखो ।

छुप छुप के जो खेल तुमने खेला है, वो हम भी खेल सकते है,
मानवता के हर दरवाजे, हम भी तोड़ सकते हैं ।

चाँदनी रात है या अमावस, शेर की दहाड़ रूक नहीं सकती है,
जमीन पे पाँव दबा के रखना, वरना पैरों तले जमीन खिसक सकती है ।

एक दो तो हम जानते नही,  शुन्य से जो शुरुआत हुई है,
अंकों का खेल मत खेलना, ना जाने कितनी  बार शुन्य हूई है ।

मरने से हम डरते नहीं,  अभी तो पुरी जिन्दगानी बाकी है,
गिन लो खुद को ठीक से, अभी तो पुरी आबादी बाकी है ।

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