Skip to main content

Posts

Featured Post

एक दावत

 कल शाम की दावत के बाद  मांस का एक टुकड़ा  ऊपर के लगे जबड़े से लटकती पिछली दाँत के बीच में जा फसा है। वापस घर आते वक्त वो पूरे रस्ते मेरे जीभ से आंख मिचौली खेलता रहा है मै अपने अथक प्रयास के बावजूद  उसे अपने दांतों से निकाल नहीं पाई हूं रास्ते भर के चले इस मसक्कत में मेरा  जबड़ा अब दुखने लगा है और  अब बस मै सो जाना ही उचित समझती हूं। सुबह उठते ही बिना किसी सोच विचार के  मेरी जीभ दांतों के किनारों का मुआयना  करने निकल जाती है  और पूरे दिन का कार्यक्रम खुद बख़ूद  ही तय हो जाता है। टुकड़े को निकाल फेंकने का  मिशन इंपॉसिबल शुरू हो चुका है अपनी व्यवहार रूपी आलस्य की  खूबियों से भरपूर मैं  खुली आंखों से स्वप्न में खो जाती हूं जिसमें मैं देखती हूं  अपने विशाल काय दांत  और उसे निहारती मेरी आँखें  मेरी आँखें देखती है कि  मांस का टुकड़ा एक पत्थर नुमा आकृति  ले चुका है और वो मेरी दांतों के बीच  अपनी जड़ें मजबूत कर के बैठा है मेरे दोनों हाथ उस चट्टान को बाहर निकालने  में जुटे हुए हैं थोड़ी कोशिश के बाद...
Recent posts

एक कोशिश

आसमान के कोने से  झूलती हुई एक पहेली  पहेली जों एक गठरी की तरह है अपने आप में बहुत सारे छोर समेटे एक छोर की तलाश अक्सर दूसरे धागे खींच देती है और पहेली एक नए सिरे से दुबारा शुरू होती है धागे के कोने खींचता व्यक्ति थकता है पसीने में डूबता है रुकता भी है पर हर बार वो एक उत्साह से फिर  सबकुछ दुबारा शुरू करता है फिर वही हताशा और फिर वही उत्साह का सिलसिला जारी रहता है एक आस,की गठरी के धागे पुराने हो जाये एक सूरज की किरण, की एक हवा का झोंका आये ओर ये सारी गुत्थियां सुलझा दे जाये एक कोशिश, की एक सुबह सब ठीक हो जाएगा  सब कुछ अनवरत चलता रहता है।

टपकता खून

तुम्हारे पर्दे से टपकता खून  कभी तुम्हारा फर्श गंदा नहीं करता वो किनारे से लग के  बूंद बूंद रिसता है  मुझे मालूम है कि  हर गुनाहगार की तरह  तुम्हे, तुम्हारे गुनाह मालूम है पर तुम्हारा जिल्ल ए इलाही बन  सबकुछ रौंद जाना  दरवाजे पर लटके पर्दे पर  और खून उड़ेल देता है।

नारीवाद

नारीवाद का जन्म एक  रईसी खानदान में हुआ है। वो दिन रात के चकाचौंध में  पली बढ़ी है। बड़े बड़े ऋषि मुनियों का मानना  है कि  यह ही एक शक्ति है  जो दुनिया के हर  महिला के दुख के  निवारण के लिए पैदा हुई है। नारीवाद का अवतार एक  देव का अवतार है  वो सबसे पहले अपना साम्राज्य  स्थापित करेगी। कष्टों के निवारण के लिए  दरबार लगाएगी।

भगवान

किताबों की पढ़ी पढ़ाई बातें अब पुरानी हो चुकी हैं। जमाना इंटरनेट का है और ज्ञान अर्जित करने का एक मात्र श्रोत भी। किताबों में देखने से आँखें एक जगह टिकी रहती हैं और आंखों का एक जगह टिकना इंसान के लिए घातक है क्योंकि चंचल मन अति रैंडम। थर्मोडायनेमिक्स के नियम के अनुसार इंसान को रैंडम रहना बहुत जरूरी है अगर वो इक्विलिब्रियम में आ गया तो वह भगवान को प्यारा हो जाएगा।  भगवान के नाम से यह बात याद आती है कि उनकी भी इच्छाएं अब जागृत हो गई हैं और इस बात का पता इंसान को सबसे ज्यादा है। इंसान यह सब जानता है कि भगवान को सोना कब है, जागना कब है, ठंड में गर्मी वाले कपड़े पहनाने हैं, गर्मी में ऐसी में रखना है और, प्रसाद में मेवा मिष्ठान चढ़ाना है।  सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंसान इस बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ यह पता कर चुका है कि भगवान का घर कहां है? वो आए दिन हर गली, शहर, मुहल्ले में उनके घर बनाता है। बेघर हो चुके भगवान के सर पर छत देता है।  इकोनॉमी की इस दौड़ में जिस तरह भारत दौड़ लगा के आगे आ चुका है ठीक उसी तरह इंसान भी भगवान से दौड़ लगा के आगे निकल आया है। अब सवाल यह है कि भगवान अग...

बेफिक्र

मेरे सपनों में तुम्हारा कोई रंग नहीं है तुम्हारे जैसी एक छाया है  जो  हू ब हू तुम्हारे जैसा है  सुबह की किरण कभी  मेरे सपने में पहुंची ही नहीं तुम्हें तौलने की बात ही  सिरे से ख़ारिज हो चुकी है तुम सपने में ही सही बेफिक्र घुमा करो। 

कितना जरूरी है

कितना जरूरी है मेरा सुंदर दिखना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा बेदाग दिखना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा सुशील होना और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा पढ़ा लिखा होना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा पर्दे में होना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा पूछ के घर से निकलना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा खाना बनाना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा मेहमानों को देखना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा नौकरी छोड़ बच्चों को देखना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा तुम्हारे लिए व्रत रखना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है मेरा बीमार होके तुम्हे 10  बार डॉक्टर के पास ले जाने के लिए कहना  और तुम्हारा पैसा कमाना? कितना जरूरी है.....