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घर

Listen to my latest performance on YourQuote app at https://www.yourquote.in/suruchi-kumari-fpjd/quotes/ghr-k1v97 तुमने जो यादें छोड़ दि थी मेरे पास युहि फटे हाल में जिसे तुमने  एक बार भी मुड़ के देखने की कोशिश तक न की वो पल जो तुमने जिये उन्हे छोड़ आये तुम मेरे दर पर या तुम्हारी जेब से सरक कर मेरे पास पहुँच ग ई वो सब मैने संभाल के लिफाफे में रख दिया है उन आँखों के दिये मे तुम हर रोज मुझे देखा करते थे वो दिपक बुझा आये तुम एक चांद कि याद मे भीनी-भीनी खुशबू जो मेरे घर में बिखेर के उसे रौंद आये तुम किसी की चाह मे वो घर मैने सजा लिया है । कभी गुजरो इन गलियों से तो अपना दिल लेते जाना पता नहीं तुम कैसे दिल लगाते फिरते हो ।

दुनिया रंग बिरंगा

न जाने कितने इमारत बने हैं कागजों पे न जाने कितने जिंदा लाशें सड़कों पे चल रहि है । चलिये उन सब से भी उनका हाल पूछ लेते हैं जो सालों से कब्रों मे कैद है न जाने कितने लोगों ने कितने जीवन उथल-पुथल कर दी है चलिए उन चंद लोगों को आज ढूंढ लेते है यू तो मगरूर इमारतें ताकतों का प्रदर्शन करती है कुछ चन्द गार मिट्टी से चलिए अपना आशियाँ बना लेते हैं ।

मिश्रा जी और कैमरा

मिश्रा जी लाॅ के स्टूडेंट है। लाॅ का स्टूडेंट होने का मतलब है कि दुनिया भर की तमाम चीजों से खुद-ब-खुद हि नाता जुड़ जाना, जैसे एक बच्चे का मां से जुड जाता है वो भी जन्म लेने के पहले हि। जैसे पत्ते हवाओ मे बिना लहरे नही रह सकते,ठीक उसी तरह लाॅ के स्टूडेंट किसी भी बात पे तार्किक बहस करने से पिछे नही रह सकते । उनकी अनगिनत विचारधारायें उसी तरह उफान मारती है जैसे फुल को देख के भैरें, और वो अपने विचारों को शब्दों में गढ़ के प्रस्तुत करते जाते हैं । अगर मैं ये कहु कि वो इसे देश मे क्रांति लाने का माध्यम भी समझते हैं तो शायद मै गलत नहीं हूँ । मिश्रा जी भी लिखते हैं, काफी अच्छा लिखते हैं  और अपनी प्रतिक्रिया से क्रांति लाने की कोशिश कर रहे हैं या अपनी बुद्धिमत्ता का प्रयोग ये कहना मुश्किल है । कलम और पन्नों का नाता सकुशल चल रहा था की  उन्हे एक मैसेज आया, कि उनके दोस्त पर्यावरण के संदर्भ में एक विडियो बनाना चाहते हैं और उसमें वो एक पैनलिस्ट की भूमिका निभायेंगे । ये विडियो एक फेसबुक पेज के लिए होने वाला था । इस पेज को कुछ लोग मिलकर चलाते है, और पर्यावरण के संदर्भ में तमाम तरह...

दिल हारना क्या होता है

महाराज ने कनीज़ से पुछा आपको जितना कैसा लगता है ॽ कनीज़ ने कहा अच्छा लगता है हुजूर जीत तो वो गहना है जो शान से पहना जाता है मुख मण्डल पे प्रकाशित किरणे खुद हि अपना गुणगान करती है पैर इतने हल्के हो जाते है मानो पंख लगाके उड चलेगें बडी मुश्किल से उन्हे जमीनी जुते पहनाने पडते है तन का हर रोम थिरकने लगता है एक ताल छुटा नही कि वो खुद को बेडियो से तोडने को बेताब हो जाते है आँखों में मानो न जाने कितने रत्न जड़ होते हैं अंधेरे को तोड़ ज्वालाओं का अम्बार होता है इतना सब कुछ जीतने के बाद भी हमें वो खुशी अभी तक नहीं मिली क्योंकि हम अपना दिल हारना चाहते है । महाराज ने पूछा दिल हारना क्या होता है ॽ

आइये सफाई करते है

सालों की पड़ गंदगी से आज देश को आबाद करते है, आइये सफाई करते है । दुर तलक खेतों, गलियों, में क्या झाड़ू मारना? नालो का भी स्वाद चखते है, आइये सफाई करते है । महंगे परिधानों का तो कहना हि नही हैं, कभी अर्ध॒ नग्न भी डुबकी लगाते है, आइये सफाई करते है । कैमरा तो समतल जमीं को भाता हि है पानी में आज फ्लैशलाइट खेलते हैं, आइये सफाई करते है । बडे बडे प्रॉजेक्ट तो है ही आखों के समक्ष कुछ विराने भी आज आबाद करते है, आइये सफाई करते है । स्वच्छंद हवाओ से तो भर ही चुके हैं अपनी सांस कुछ बदबुये भी अपने नाम करते है आइये सफाई करते है ।

लम्बा सफर

ये वक़्त की  आहट उनसे पूछिये, जिनके दिन रात किनारों को तकते गुजरे थे । ये  शाम सवेरे का रंग उनसे पूछिये, जिनके सतरंगी सपने  आसमां में तैर रहे थे । वो कर्कश वाणी का प्रहार उनसे पूछिये, जिससे वो महफिलों में  अपनो का हाथ छोड़ देते थे । वो सासों का रूकना उनसे पूछिये, जिनके घर उनके  आँखों के सामने बिखरे थे । ये खुशी  उनसे पूछिये, जिनके  अरमां धड़कते दिल के तालो में कैद थी । ये  आजादी उनसे पूछिये, जिनके ख्वाब हकीकत के लिए एक फैसले की मोहताज थी ।

हर॒रोज

सुबह का कोहरा धूप को निकलने की  इजाजत नहीं दे रहा था। चारों ओर धुआं धुआं सा फैला था । मीरा खिड़की से झांकते हुए बाहर के मौसम को आँखों में भर लेना चाहती थी। तभी  उसने देखा बाहर उसके बाबा किसी से बात कर रहे है, वह व्यक्ति काले कंबल में लिपटा जाना पहचाना लग रह था। मीरा ने गौर से देखने की कोशिश की, अरे, ये तो रिया के पापा है । ये यहां क्या कर रहे है ॽ ओर बाबा से क्या बात कर रहे हैॽ खैर, कुछ भी हो वो खुश थी  आज उसे मौका मीला है  उनकी  आवभगत करने का। वह दौड़ी दौड़ी बाहर आई, अपने साँसों को थामते हुए बोली, माँ रिया के पापा  आये हैं । माँ ने इसका कोई जवाब नहीं दिया । माँ, मैं उनके लिए नाश्ता ले कर जाऊं ॽ बर्तन खाली नहीं है,  उन्होंने खिजते हुए कहा । पर इतने सारे तो बर्तन तो पड़ है यहां पर, उसने बर्तन की टोकरी की ओर देखते हुए कहा । कहा न, कोई बर्तन खाली नहीं है, मुझे ढूढना पड़ेगा,  ओर वैसे भी वो मेरे यहां कोई नास्ता ॒पानी  करने नहीं आये हैं, काम से आये हैं । माँ ने गुस्से से कहा । और अभी  इतना सवेरा है इतनी सुबह नास्ता कौन करता है ...